रविवार, 23 जून 2024

जानिए आदिवासी लोककथा: हँड़िया की प्रथा-Janiye Aadiwasi Lokkatha : Handiya Ki Pratha




जानिए आदिवासी लोककथा: हँड़िया की प्रथा

प्रस्तुतकर्ता: इग्नातिया टोप्पो

प्रस्तावना:

हँड़िया नामक पेय आदिवासी संस्कृति में स्वदेशी पेय के नाम से प्रचलित है इसका औषधीय उपयोग भी काफी मात्रा में किया जाता है एशिया और अफ्रीका के आदिवासी भी इसका एक औषधीय उपयोग के रूप में प्रयोग करते हैं यह पेय चावल की अनाज से बना हुआ होता है हम इस पोस्ट के माध्यम से इग्नातिया टोप्पो द्वारा प्रस्तुत इस पेय पर लिखी आदिवासी लोककथा को जानने की कोशिश करेंगे

हँड़िया की प्रथा (लोककथा)

हँड़िया नाक नशीले पेय का प्रयोग न केवल खड़िया समाज द्वारा किया जाता है बायु कई आदिवासी समूह इसका प्रयोग करते हैं। किसी भी प्रकार का धार्मिक एवं सामाजिक व्रत-उत्सव या अनुष्ठान इस पेय के बिना संपन्न नहीं हो सकता। इसे कब से और कैसे बनाया जाने लगा या इसका प्रयोग कब से और किस रूप में किया जाने लगा, इसकी भी एक कथा है।

कहा जाता है कि महादेव और पार्वती ने करम जतरा लगाया था। उन्होंने करम पूजा और जतरा के लिए सबको निमंत्रण दिया। करम राजा की पूजा धूमधाम से हुई। जमकर नाच-गाना हुआ लेकिन किसी को मज़ा नहीं आया। लोगों ने आपस में बात की कि न जाने क्यों करम पूजा और जतरा में मज़ा नहीं आया। लोगों की शिकायती बातें महादेव और पार्वती के कानों तक पहुँच गई। उन्होंने लोगों को खुश करने का उपाय सोचा। पार्वती ने महादेव की सहायता से कुछ ख़ास जड़ी-बूटियों की चावल में मिलाकर एक नशीला पेय अर्थात् 'हँड़िया' तैयार की। उन दोनों ने फिर से करम पूजा और जतरा का आयोजन किया। पुनः सबको निमंत्रित किया। पूजा संपन्न हो जाने के बाद चावल द्वारा बनाई गई उसी हँड़िया को प्रसाद के रूप में वितरित किया। गाँव भर के लोग रात भर हँड़िया पीते रहे और मस्ती से नायते-गाते रहे। नशे में मस्त लोगों के नाचने-गाने का कोई अंत नज़र नहीं आ रहा श्रा, ती महादेव और पार्वती ने खुशामद करके हवा और पानी को बुलाया। हवा-पानी के आने से उनका नशा उतरा और नाच-गाना भी बंद हुआ। तब से हर तरह के धार्मिक एवं सामाजिक अनुष्ठान एवं उत्सव आदि में हँड़िया का प्रयोग अवश्य किया आता है।

'आदिवासी लोककथा' ब्लॉग से जुड़ने के लिए निम्न व्हाट्सएप ग्रुप चैनल तथा टेलीग्राम ग्रुप को जॉइन करें...

Whatsapp Group
Whatsapp Channel
Telegram channel

कोई टिप्पणी नहीं: