बुधवार, 26 जून 2024

मिज़ो आदिवासी लोककथा: छूरा के सींग-Mijho Aadiwasi Lokakatha :chhura ke sing


 मिज़ो आदिवासी लोककथा: छूरा के सींग

प्रस्तुति : डॉ. एल.टी. लियाना खियांगते
अनुवाद : सारंग कुमार

एक गांव में छूरा नाम का बहादुर और विनोदप्रिय व्यक्ति रहता था। उसका सबसे अच्छा मित्र उसका सगा भाई नहाइया था, जिसे ना के उपनाम से पुकारा जाता था। यह छूरा की मूर्खता और लापरवाही का लाभ उठाने में माहिर था। दोनों भाइयों का मुख्य पेशा खेती था। उनके धान के खेत गांव से कुछ ही दूरी पर थे। नहाइया के खेत के कोने पर एक बहुत बड़ा पेड़ था, जिस पर भोजन की खोज में आनेवाले पक्षी विश्राम किया करते थे। नहाइया चिड़ियों का चहचहाना बर्दाश्त नहीं करता था और पत्थरों या अपने हथियार 'साइरोखे' से उन चिड़ियों का शिकार किया करता था।

भाग्य या दुर्भाग्यवश नहाइया द्वारा फेंका गया पत्थर पेड़ की खोखर में चला गया। उस खोखर में एक प्रेतात्मा अपने बच्चों के साथ रहती थी। पत्थर से भूतनी घायल हो गई। उसे गुस्सा आ गया और हमलावर को उसने अपनी अदृश्य शक्ति से बदला लेने की चेतावनी दी। उसने अज्ञात भाषा में हमलावर को डराने के लिए तरह-तरह की ध्वनियां निकालीं।

प्रेतात्मा का गुस्सा देख चालाक नहाइया ने उस खेत को बेचने का मन बना लिया ताकि वह उस भूतनी के शाप से बच सके। उसने सोचा कि खेत के नए मालिक को ही यह शाप लगेगा। नहाइया ने अपने छोटे भाई छूरा के सामने झूमवाले खेत को बदलने का प्रस्ताव रखा। अपना खेत दिखाने के बाद उसने छूरा से कहा कि वह खेत ले ले और बदले में दूसरा खेत उसे दे दे। भोला-भाला छूरा भाई की बात मान गया। अगले दिन छूरा अपने नए खेत पर गया। नहाइया के कहे मुताविक छूरा ने खेत में एक पेड़ खड़ा पाया, जिसकी शाखाओं पर बहुत-सी चिड़ियां बैठी थीं। उसके मन में कुछ चिड़ियों का शिकार करने का लालच आ गया। उसने चिड़ियों को निशाना बनाकर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। पहले की तरह ही प्रेतात्मा ने अज्ञात भाषा में कुछ कहना शुरू किया, क्योंकि उन पत्थरों से उसके बच्चों को चोट पहुंच रही थी। पूरा ने प्रेतात्मा की चेतावनी को अनसुना कर दिया और चिड़ियों पर लगातार पत्थर फेंकता रहा। भूतनी ने महसूस किया कि खेत का नया मालिक काफी साहसी है, इसलिए उसे डराकर भगाना आसान नहीं है। वह खोखर के एक कोने में दुबक गई और छूरा को माफ कर दिया। अब वह उस खोखर के पास पहुंच गया जहां से अपरिचित आवाज आ रही थी। उसने खोखर में झांककर देखा उसमें बच्चे तो थे, पर मां गायब थी। छूरा ने खोखर में से एक-एक बच्चे को निकाला और निगलना शुरू कर दिया। देखते-ही-देखते भूतनी के सारे बच्चे मर गए। वहां से आकर वह खेत की झोपड़ी में छुप गया। भूतनी अपने बच्चों की मौत पर खूब रोई। अब छूरा ने प्रेतात्मा को भी पकड़ने की योजना बनाई। उसने झोंपड़ी में एक झूला बनाया और स्वयं अलग जाकर छुप गया ताकि प्रेतात्मा को लगे कि घर चला गया है। कुछ समय बाद भूतनी झोंपड़ी में बने झूले पर आकर बैठ गई और खुद को अकेली महसूस कर एक दर्दभरा गीत गाने लगी। वह बिना देरी किए बाहर निकला और झट भूतनी के बाल कसकर पकड़ लिए। उसने प्रेतात्मा को गांव में ले जाकर उससे बच्चों का मनोरंजन कराने की धमकी दी। भूतनी ने उससे ऐसा न करने की गुहार की और उसे छोड़ने के एवज में एक तलवार भेंट करने का वादा किया। उसने जवाब दिया कि उसके पास पहले से ही एक कुल्हाड़ी है। फिर भूतनी ने उसे एक कुदाल का लालच दिया, परंतु उसने इसे भी लेने से इनकार कर दिया, क्योंकि इसे चलाने के लिए बड़ी ताकत की जरूरत होती है। भूतनी यह सोचकर भय से कांप रही थी कि गांव में बच्चों के सामने उसकी क्या गत बना दी जाएगी। इसलिए उसने उसे अपनी सबसे कीमती वस्तु जादू का सींग देने का लालच दिया। छूरा ने इस प्रस्ताव को खुशी से स्वीकार कर लिया। वह जानता था कि बिना प्रयास के ही इस सींग के एक छोर से खाना बनाया जा सकता है और दूसरे छोर से गोश्त उबाला जा सकता है।

जादू के सींग का महत्त्व जानकर छूरा ने भूतनी को छोड़ दिया और सींग लेकर घर चला गया। इस कीमती सींग के जरिए छूरा व उसके परिवार को मुफ्त में ही पूरे दिन का स्वादिष्ट भोजन मिलने लगा। पूरे परिवार ने अब काम करना बंद कर दिया और परिवार के सभी सदस्य लापरवाही से लड़ने लगे। जब नहाइया को भाई के पास जादू के सींग होने का पता चला, तो उसे छूरा से ईर्ष्या होने लगी। कुछ दिन बाद नहाइया ने छूरा से यह सींग ले लेने की चाल चलनी शुरू कर दी। उसने छूरा को चेताया कि तुम्हारे घर में कभी भी आग लग सकती है, इसलिए यह सींग फेंक दो। एक दिन नहाइया ने छूरा के घर के पास सूखे बांस व केन की लकड़ियों का ढेर लगाकर उसमें आग लगा दी और आंगन में आकर "आग... आग..." चिल्लाने लगा। उसने छूरा से कहा कि आग उसी जादू के सींग के कारण लगी है, इसलिए उसे लेकर बाहर आने के लिए कहा। छूरा जल्दी से बाहर निकला, पर दरवाजे पर ठेस लगने के कारण गिर पड़ा। सींग उसके हाथ से छूटकर दूर जा गिरा। नहाइया इसी मौके की तलाश में था। उसने झपटकर सींग उठा लिया और चलता बना।
इस घटना से छूरा काफी दुःखी था। वह सींग वापस लेना चाहता था। इसके लिए उसने भी एक योजना बनाई। नहाइया की तरह ही उसने भी उसके घर पहुंचकर यह बात दोहराई कि जब घर में आग लग जाए तो सबसे पहले सींग को लेकर घर से भाग जाना चाहिए। कुछ समय बाद छूरा ने नहाइया के घर के बाहर आग लगा दी और उसी अंदाज में चिल्लाने लगा। हालांकि नहाइया ने सोच रखा था कि छूरा की बात में आना नहीं है, इसलिए उसने भाई की बात पर ध्यान नहीं दिया और पास पड़ा पत्थर का मूसल उठाकर भागते हुए गिरने का अभिनय कर मूसल को छूरा की ओर फेंक दिया। मूसल छूरा की पिंडली की हड्डी पर जा लगा। दर्द से वह बिलविला उठा और भुनभुनाते हुए कहा, "मुझे वही चीज रखनी है जो नहाइया को नापसंद है।" नहाइया अपने छोटे भाई छूरा से काफी चालाक निकला। उसने भाई को सींग नहीं लौटाया और जादू-भरी उस वस्तु का भरपूर फायदा उठाया। अब वह प्रतिदिन एक-से-एक स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेने लगा।

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